भाग्य, कर्म, जीवन एवं जीसा (JeeSa)

भाग्य (डेस्टिनी) हमारे जीवन में जंजीर की तरह कार्य करता है | यह हमें अपने अनुसार चलने के लिए बाध्य करता है। हम इसके अधीन रह कर अपना पूरा जीवन इसके अनुसार ही निकाल देते हैं । जब भाग्य अच्छा होता है तो जीवन अच्छा प्रतीत होता है, और जब भाग्य प्रतिकूल होता है तो जीवन में संघर्ष बढ़ जाता है ।

यानि एक प्रकार से हम इसके गुलाम बन जाते हैं । हम सिर्फ भाग्य के अनुसार भोगने और भुगतने वाले बन कर रह जाते है।

ऐसे में तनावमुक्त और सुखद जीवन का उद्धेश्य पूर्ण नहीं हो सकता क्योंकि अच्छा या बुरा सब कुछ भाग्य के अनुसार ही होता है।

क्या इसका अर्थ यह है कि कर्म का कोई अस्तित्व नहीं है?

नहीं !

कर्म ही सब कुछ है, क्योंकि कर्म से जीवन बनता है।

लेकिन सबसे बड़ा रहस्य यह है कि भाग्य सबसे पहले विचारों और फिर कर्म पर नियंत्रण कर लेता है। यह हमारे विचारों को दिशा देता है और उसी के अनुसार कर्म करने के लिए हमें विवश कर देता है। हम वही कर्म करते हैं जो वह चाहता है ।

यदि आप जीवन की डोर अपने हाथों में लेना चाहते हैं,अपने शर्तों पर जीना चाहते हैं,अपने उद्देश्यों को प्राप्त करना चाहते हैं,और तनावमुक्त, समस्या रहित, सुखी एवं समृद्ध जीवन जीना चाहते हैं,तो आवश्यक है कि आप भाग्य (डेस्टिनी) के मदरबोर्ड /कार्यप्रणाली को जानें और समझें।

डेस्टिनी को समझना क्यों आवश्यक है ?

आज के समय में डेस्टिनी के साथ-साथ Heredity, surrounding circle, place  और Knowledge & Experience ये चारों भी हमारे कर्मों के निर्धारण में भूमिका निभाते हैं। परंतु जब डेस्टिनी की पकड़ मजबूत होती है तो ये चारों तत्व भी उसी के सहयोगी बन जाते हैं।

हम अज्ञानतावश नकारात्मक विचारों को रोकने के बजाय उन्हीं के अनुसार कार्य करने लगते है । डेस्टिनी में यदि रोग, तलाक, दुर्घटना, झगड़ा, कोर्ट केस, कारावास और व्यवसायिक हानि जैसे नकारात्मक योग हैं, तो हम स्वयं उनके घटित होने के माध्यम बन जाते हैं। हमारे सहयोग के बिना नकारात्मक घटनाएँ कभी घटित नहीं  सकतीं। इसलिए जीवन की सबसे बड़ी जीत यह है कि डेस्टिनी के अनुसार चलने के बजाय, डेस्टिनी को अपने अनुसार चलाया जाए। जैसे यदि किसी व्यक्ति की डेस्टिनी में पैतृक संपत्ति न मिलने का योग है तो इस घटना के घटित होने के लिए सबसे पहले संबंधित  व्यक्ति के मस्तिष्क में नेगेटिव विचारों का निर्माण होना प्रारंभ होता है ।

इसे एक उदाहरण से समझते है

कुछ दिनों से पिताजी बीमार चल रहे हैं, बड़ा भाई रामू अपेक्षित सेवा नहीं कर पा रहा था । ऐसे में छोटे भाई श्यामू के मन में यह विचार आता है कि मेरा भाई सेवा नहीं कर रहा, तो मैं भी क्यों करूँ?” सभी जिम्मेदारी मेरी थोड़ी है ।यही विचार धीरे-धीरे व्यवहार में बदलते है एवं श्यामू पूरी तरह से पिताजी की देखभाल करना बंद कर देता है ।

समय बीतता है, पिता स्वस्थ हो जाते हैं। लेकिन कुछ वर्षों बाद जब पिता का देहांत होता है, तो श्यामू के उस समय के व्यवहार के कारण वे अपनी वसीयत में उसके  नाम कुछ नहीं लिखते। सारी जायदाद बड़े भाई रामू के नाम करके चले जाते है | अर्थात यह घटना स्वयं उसी व्यक्ति के कर्मों और व्यवहारों के माध्यम से घटित हुई । वह अपनी ही डेस्टिनी का साधन बन गया ।

अतः आपके सहयोग से ही नेगेटिव डेस्टिनी अपना कार्य करने सफल हो सकती है ।

नेगेटिव डेस्टिनी से बचने के मार्ग

  1. भारतीय दर्शन :-

वेद ,वेदांगो पुराणों ,शास्त्रों के अनुसार आध्यात्मिक जीवन जी रहे हैं तो उपरोक्त उदाहरण अनुसार पिता की सेवा नहीं करने जैसे विचारों को स्वीकार ही नहीं करेंगे और नेगटिव डेस्टिनी के चंगुल से अपने आप बाहर आ जाएंगे |

  1. गुरु से मार्गदर्शन :-

जीवन में किसी भी कार्य को करने लिए हमारे पास कई जस्टिफिकेशन होते हैं एवं नहीं करने के भी कई जस्टिफिकेशन मौजूद होते हैं | ऐसी दुविधा में आप नेगेटिव डेस्टिनी द्वारा समर्थित विचारों को ही जस्टिफाई करेंगे |

पूर्व में गुरु शिष्य परम्परा में व्यक्ति ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति में गुरु से मार्गदर्शन प्राप्त कर निर्णय करते थे | समर्थ गुरू आपकी नेगेटिव डेस्टिनी को अच्छी तरह पहचान लेते थे एवं उत्पन्न होने वाले नेगेटिव विचारों को पढ़ कर उसके चंगुल से बाहर निकाल देते हैं | लेकिन अगर आप गुरु आज्ञा पर दृढ़ता नहीं रखेंगे तो नेगेटिव डेस्टिनी आपके विचारों को प्रभावित करती हुई आपको हाईजैक करने में सफल हो जाती है | इसीलिए शास्त्रों में गुरु पर श्रद्धा एवं विश्वास रखने को अत्यन्त ही महत्वपूर्ण बताया गया है क्योंकि श्रद्धा एवं विश्वास से ही आप गुरु के मार्गदर्शन को लागू कर पाएंगे अन्यथा गुरु के मार्गदर्शन को छोड़कर फिर आप अपनी नेगेटिव डेस्टिनी के अनुसार कार्य करने लग जाएंगे और उपरोक्त उदाहरण अनुसार पिता की सेवा नहीं करने के विचार का ही समर्थन करेंगे |

  1. जीसा(JeeSa) थेरेपी (जीवन से साक्षात्कार) :-

वर्तमान में हमने भारतीय दर्शन से मिले जीवन मूल्यों को “आदर्शवाद ”, “अंधविश्वास” और “रूढ़िवादिता” कह कर त्याग दिया है। वास्तविक गुरु–शिष्य परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है, इसलिए उचित मार्गदर्शन का अभाव है (वर्तमान में गुरु शिष्य परंपरा प्रतीकात्मक अधिक है) |

ऐसे समय में जीसा (JeeSa)  थेरेपी एक ऐसा सशक्त आधार है, जो अपने सात सूत्रों के माध्यम से व्यक्ति को डेस्टिनी के चंगुल से मुक्त कर सकती है। यह व्यक्ति के वीक एरियाज़ (Weak Areas) को पहचानकर उन्हें स्ट्रॉन्ग एरियाज़ (Strong Areas) में परिवर्तित करती है, जिससे जीवन में घटने वाली नकारात्मक घटनाओं से बचाव संभव हो जाता है।

JeeSa Therapy Happy Life Sukhad Jeevan Sansthan

जीसा (JeeSa)  नेगेटिव डेस्टिनी से मुक्ति का माध्यम है ।

इसका मूल सिद्धांत है

सद्विचारों से सद्कर्मों का और सद्कर्मों से सुखद जीवन का निर्माण होता है।

Destiny and Luck Steps to get happy life

यदि विचार अच्छे हैं तो जीवन अच्छा है, और यदि विचार नकारात्मक हैं तो जीवन भी वैसा ही हो जाता है।

लेकिन जो व्यक्ति डेस्टिनी से प्रभावित होता है, वह बुरे विचारों को पकड़ नहीं पाता , उलटे उन्हें ही सही सिद्ध (justify) करने में लग जाता है, और उन्हीं विचारों पर कार्य करता है।

जब जीवन में निराशाजनक परिणाम आते हैं, तब वह पूजा-पाठ, यंत्र–मंत्र, तंत्र, वास्तु, ज्योतिष ,जादू टोना जैसे उपायों की ओर भागता है। परंतु जब लकड़ी जल चुकी होती है, तो उसे वापस कैसे लाया जा सकता है । घटना घट चुकी होती है अब उसे रिवर्स नहीं किया जा सकता है ।

संसार में अभी तक सभी ग्रंथों उपदेशों में कर्मों में सुधार करने के प्रयास किया जाता रहा है | जैसे अच्छे कर्म करो अच्छा फल मिलेगा । लेकिन कर्मों के उदगम स्त्रोत विचारों एवं वीक एरिया (Weak Areas) को संज्ञान में नहीं लेने से जीवन  सुखद होना संभव नहीं हो पाया है।  इसीलिये व्यक्ति को नेगेटिव डेस्टिनी को भुगतना पड़ रहा है ।

Destiny and Luck Steps to get happy life

हमारे शोध एवं अध्ययन के द्वारा यह स्पष्ट हो गया है कि व्यक्ति का जीवन वीक एरिया एवं स्ट्रांग एरिया के कॉम्बिनेशन का परिणाम होता है | वीक एरिया जीवन में संघर्ष, समस्याओं ,बीमारियों आदि सभी तरह की नेगेटिव परिस्थितियों का निर्माण करता है एवं स्ट्रांग एरिया जीवन को सुखी एवं समृद्ध बनाने का कार्य करता है |

उपरोक्त उदहारण में पैतृक संपत्ति का संबंध वीक एरिया से होने के कारण श्यामू के मन में पिता की देखभाल नहीं करने जैसे विचारों के उत्पन्न होने एवं उन्हीं विचारों के अनुसार कार्य करने के कारण उसे पैतृक संपत्ति से वंचित होना पड़ा था | यदि पैतृक संपत्ति का संबंध उसके स्ट्रांग एरिया से होता तो विचारों का पैटर्न यह होता कि मेरा भाई सेवा कार्य नहीं कर रहा है तो कोई बात नहीं मैं सेवा कार्य करूंगा मुझे पढ़ाया ,लिखाया एवं सक्षम बनाया है, उनकी सेवा करना मेरी जिम्मेदारी है | ऐसे विचार होते तो श्यामू निश्चित ही पैतृक संपत्ति से वंचित नहीं होता |

Destiny and Luck Steps to get happy life

जीसा(JeeSa)  जीवन मे नुकसान (Losses) या संघर्ष देने वाले वीक एरिया से उत्पन्न नेगेटिव विचारों को ही ब्लॉक कर उनके अनुसार कर्म करने पर रोक लगा देता है | फलत: व्यक्ति के जीवन में घटित,होने वाले कई अरिष्ट , संघर्ष , समस्याओं से बचाव हो जाता है |

अर्थात्  Solution before  Problems

 

वीक एरिया से        ->    नेगेटिव डेस्टिनी

नेगेटिव डेस्टिनी से ->   निगेटिव विचार

निगेटिव विचार से   ->  नेगेटिव कर्म

नेगेटिव कर्म से       -> जीवन में संघर्ष एवं समस्याए

 

जीसा (JeeSa)  वीक एरिया को स्ट्रांग एरिया में परिवर्तित कर जीवन की समस्त नेगेटिव घटनाओं  को खत्म करने में सफल सिद्ध हुई है |

Destiny and Luck Steps to get happy life

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